[{"data":1,"prerenderedAt":387},["ShallowReactive",2],{"slokas-list-hi-hanuman":3,"lord-list-slokas-hi":369},[4],{"sloka_id":5,"title":6,"body":7,"excerpt":354,"lord":368},"hanuman-chalisa","हनुमान चालीसा",{"type":8,"value":9,"toc":350},"minimark",[10,14,22,24,30,32,38,40,46,48,54,56,62,64,70,72,78,80,86,88,94,96,102,104,110,112,118,120,126,128,134,136,142,144,150,152,158,160,166,168,174,176,182,184,190,192,198,200,206,208,214,216,222,224,230,232,238,240,246,248,254,256,262,264,270,272,278,280,286,288,294,296,302,304,310,312,318,320,326,328,334,336,342,344],[11,12,6],"h1",{"id":13},"हनुमान-चालीसा",[15,16,17,18,21],"p",{},"श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि",[19,20],"br",{},"\nबरनौं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥",[19,23],{},[15,25,26,27,29],{},"बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार",[19,28],{},"\nबल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ॥",[19,31],{},[15,33,34,35,37],{},"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर",[19,36],{},"\nजय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ 1 ॥",[19,39],{},[15,41,42,43,45],{},"राम दूत अतुलित बल धामा",[19,44],{},"\nअंजनि पुत्र पवन सुत नामा ॥ 2 ॥",[19,47],{},[15,49,50,51,53],{},"महाबीर बिक्रम बजरंगी",[19,52],{},"\nकुमति निवार सुमति के संगी ॥ 3 ॥",[19,55],{},[15,57,58,59,61],{},"कंचन बरन बिराज सुबेसा",[19,60],{},"\nकानन कुंडल कुंचित केसा ॥ 4 ॥",[19,63],{},[15,65,66,67,69],{},"हाथ बज्र और ध्वजा बिराजै",[19,68],{},"\nकाँधे मूँज जनेऊ साजै ॥ 5 ॥",[19,71],{},[15,73,74,75,77],{},"शंकर सुवन केसरी नंदन",[19,76],{},"\nतेज प्रताप महा जग वंदन ॥ 6 ॥",[19,79],{},[15,81,82,83,85],{},"विद्यावान गुनी अति चातुर",[19,84],{},"\nराम काज करिबे को आतुर ॥ 7 ॥",[19,87],{},[15,89,90,91,93],{},"प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया",[19,92],{},"\nराम लखन सीता मन बसिया ॥ 8 ॥",[19,95],{},[15,97,98,99,101],{},"सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा",[19,100],{},"\nविकट रूप धरि लंक जरावा ॥ 9 ॥",[19,103],{},[15,105,106,107,109],{},"भीम रूप धरि असुर संहारे",[19,108],{},"\nरामचंद्र के काज संवारे ॥ 10 ॥",[19,111],{},[15,113,114,115,117],{},"लाय संजीवन लखन जियाये",[19,116],{},"\nश्री रघुवीर हरषि उर लाये ॥ 11 ॥",[19,119],{},[15,121,122,123,125],{},"रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई",[19,124],{},"\nतुम मम प्रिय भरत सम भाई ॥ 12 ॥",[19,127],{},[15,129,130,131,133],{},"सहस बदन तुम्हरो यश गावैं",[19,132],{},"\nअस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ 13 ॥",[19,135],{},[15,137,138,139,141],{},"सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा",[19,140],{},"\nनारद सारद सहित अहीसा ॥ 14 ॥",[19,143],{},[15,145,146,147,149],{},"यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते",[19,148],{},"\nकवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥ 15 ॥",[19,151],{},[15,153,154,155,157],{},"तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा",[19,156],{},"\nराम मिलाये राज पद दीन्हा ॥ 16 ॥",[19,159],{},[15,161,162,163,165],{},"तुम्हरो मंत्र विभीषण माना",[19,164],{},"\nलंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ 17 ॥",[19,167],{},[15,169,170,171,173],{},"युग सहस्र योजन पर भानू",[19,172],{},"\nलिल्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ 18 ॥",[19,175],{},[15,177,178,179,181],{},"प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं",[19,180],{},"\nजलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ 19 ॥",[19,183],{},[15,185,186,187,189],{},"दुर्गम काज जगत के जेते",[19,188],{},"\nसुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ 20 ॥",[19,191],{},[15,193,194,195,197],{},"राम दुआरे तुम रखवारे",[19,196],{},"\nहोत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ 21 ॥",[19,199],{},[15,201,202,203,205],{},"सब सुख लहै तुम्हारी सरना",[19,204],{},"\nतुम रक्षक काहू को डर ना ॥ 22 ॥",[19,207],{},[15,209,210,211,213],{},"आपन तेज सम्हारो आपै",[19,212],{},"\nतीनों लोक हाँक ते काँपै ॥ 23 ॥",[19,215],{},[15,217,218,219,221],{},"भूत पिसाच निकट नहिं आवै",[19,220],{},"\nमहावीर जब नाम सुनावै ॥ 24 ॥",[19,223],{},[15,225,226,227,229],{},"नासै रोग हरै सब पीरा",[19,228],{},"\nजपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ 25 ॥",[19,231],{},[15,233,234,235,237],{},"संकट ते हनुमान छुड़ावै",[19,236],{},"\nमन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥ 26 ॥",[19,239],{},[15,241,242,243,245],{},"सब पर राम तपस्वी राजा",[19,244],{},"\nतिन के काज सकल तुम साजा ॥ 27 ॥",[19,247],{},[15,249,250,251,253],{},"और मनोरथ जो कोई लावै",[19,252],{},"\nसोइ अमित जीवन फल पावै ॥ 28 ॥",[19,255],{},[15,257,258,259,261],{},"चारों युग परताप तुम्हारा",[19,260],{},"\nहै परसिद्ध जगत उजियारा ॥ 29 ॥",[19,263],{},[15,265,266,267,269],{},"साधु संत के तुम रखवारे",[19,268],{},"\nअसुर निकंदन राम दुलारे ॥ 30 ॥",[19,271],{},[15,273,274,275,277],{},"अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता",[19,276],{},"\nअस वर दीन जानकी माता ॥ 31 ॥",[19,279],{},[15,281,282,283,285],{},"राम रसायन तुम्हरे पासा",[19,284],{},"\nसदा रहो रघुपति के दासा ॥ 32 ॥",[19,287],{},[15,289,290,291,293],{},"तुम्हरे भजन राम को पावै",[19,292],{},"\nजनम जनम के दुख बिसरावै ॥ 33 ॥",[19,295],{},[15,297,298,299,301],{},"अंत काल रघुबर पुर जाई",[19,300],{},"\nजहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥ 34 ॥",[19,303],{},[15,305,306,307,309],{},"और देवता चित्त न धरई",[19,308],{},"\nहनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥ 35 ॥",[19,311],{},[15,313,314,315,317],{},"संकट कटै मिटै सब पीरा",[19,316],{},"\nजो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ 36 ॥",[19,319],{},[15,321,322,323,325],{},"जय जय जय हनुमान गोसाई",[19,324],{},"\nकृपा करहु गुरुदेव की नाई ॥ 37 ॥",[19,327],{},[15,329,330,331,333],{},"जो सत बार पाठ कर कोई",[19,332],{},"\nछूटहि बंदि महा सुख होई ॥ 38 ॥",[19,335],{},[15,337,338,339,341],{},"जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा",[19,340],{},"\nहोय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ 40 ॥",[19,343],{},[15,345,346,347,349],{},"तुलसीदास सदा हरी चेरा",[19,348],{},"\nकीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥",{"title":351,"searchDepth":352,"depth":352,"links":353},"",2,[],{"type":8,"value":355},[356,358,362,364],[11,357,6],{"id":13},[15,359,17,360,21],{},[19,361],{},[19,363],{},[15,365,26,366,29],{},[19,367],{},"हनुमान",[370,373,375,378,381,384],{"lord_id":371,"name":372},"ganesh","गणेश",{"lord_id":374,"name":368},"hanuman",{"lord_id":376,"name":377},"rama","रामचन्द्राय",{"lord_id":379,"name":380},"shani","शनि",{"lord_id":382,"name":383},"shiva","शिव",{"lord_id":385,"name":386},"surya","सूर्य",1787727864661]